सेरेब्रल पाल्सी तंत्रिका तंत्र से जुड़ी एक गंभीर और दर्दनाक बीमारी है, जो गर्भावस्था के दौरान या जन्म के बाद भी हो सकती है। इस बीमारी में बच्चे का मस्तिष्क कमजोर हो जाता है, जिससे शरीर की कई नसें काम करना बंद कर देती हैं। सतना जिले के पीकू वार्ड में हर साल 100 से अधिक बच्चे इस बीमारी से पीड़ित होकर भर्ती किए जाते हैं। डॉक्टरों के अनुसार, इसका कोई स्थायी इलाज नहीं है, लेकिन फिजियोथेरेपी बच्चों के जीवन में सुधार लाने का सबसे बड़ा सहारा है।
सतना जिला अस्पताल में अव्यवस्थाओं का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। पीकू वार्ड में हंगामे के बीच बच्चे की मौत हो गई, वार्ड नंबर 8 में नवजात की मां से पोंछा लगवाया गया और हाईरिस्क प्रसूता को स्ट्रेचर तक नसीब नहीं हुआ।
सतना जिला अस्पताल का पीकू वार्ड असामाजिक तत्वों के निशाने पर है। 30 अगस्त की रात देव पंडित और उसके साथियों ने ड्यूटी कर रहे रेजीडेंट डॉक्टरों से अभद्रता की और जान से मारने की धमकी दी। इसके बाद 31 अगस्त से 2 सितम्बर तक लगातार वार्ड में आकर डॉक्टरों के बारे में पूछताछ कर धमकियां दी जाती रहीं।
सतना जिले में वायरल फीवर का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है। सबसे ज्यादा असर बच्चों पर देखा जा रहा है, जिनमें कोविड जैसे लक्षण पाए जा रहे हैं। जिला अस्पताल का पीकू वार्ड ओवरलोड हो गया है—20 बेड वाले वार्ड में 75 से ज्यादा बच्चे भर्ती हैं। कई बच्चों का बुखार पैरासिटामॉल से भी नहीं उतर रहा और एंटीबायोटिक डोज देनी पड़ रही है।
सतना जिला अस्पताल में सोमवार को 2250 से ज्यादा मरीजों ने ओपीडी में पंजीयन कराया, जो 2012 के बाद सबसे बड़ी संख्या है। बदलते मौसम में वायरल बुखार, सर्दी-खांसी और पेट दर्द से पीड़ित मरीजों की भीड़ ने अस्पताल की व्यवस्था चरमराई दी। वार्ड फुल हो गए और बच्चों का पीकू वार्ड क्षमता से दोगुना भर गया।
















